नमस्कार दोस्तों SMART INDIA INFO में आज हम आपको COVID19 के बारे में बताएंगे, COVID19 से जुड़ी जानकारी आपको देंगे, जैसे COVID19 क्या हैकोरोना से क्‍या होता है , कोराना का प्रभाव , कोराना से बचाव कैसे करें आदि

कोरोना क्‍या है -

कोरोना शब्द को सुनते ही हमारे मन में एक भय का अँधेरा दिखाई देता है किन्तु हमारे सामने यह प्रश्न सबसे ज्‍यादा आता है कि आखिर कोरोना है क्या... कोरोना के विषय में एक तथ्य सभी को पता है कि यह एक वायरस( Virus) है किन्तु सर्वप्रथम यह भी ज्ञात होना अत्यंत आवश्यक है कि वायरस होता क्या है और यह किस प्रकार हमारे शरीर को क्षति पहुंचा सकता है, उक्त युक्तियों के बोध के पश्चात् ही हम कोरोना वायरस को समझ सकते है...

वायरस
एक परजीवी होता है जिसका स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं होता है बल्कि वह एक शरीर से दूसरे शरीर में समावेश करता है एवं अपने संक्रमण या अपनी गतिविधियों के अनुरूप उक्त शरीर को ग्रसित करता है. साथ ही ज्ञात हो कि प्रत्येक वायरस के अपने अलग लक्षण होते है और उक्त अनुसार वायरस के शरीर में प्रवेश करने, ग्रसित करने और संक्रमण के उपरांत संक्रमित शरीर में आने वाले बदलाव के उक्त लक्षण दृष्टिगोचर होते है। 
कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है. इस वायरस को इससे पहले कभी नहीं देखा गया है।



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कोरोना से क्‍या होता है -

कोरोना वायरस से जहां इंसान के गले एवं फेफड़ों में इंफेक्‍शन होते है. वहीं इसके दो मुख्‍य लक्षण होते हैं बुख़ार और सूखी खांसी, अनेको बार इसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में भी परेशानी आती है. कोरोना के कारण होने वाली खांसी आम खांसी नहीं होती, इस कारण लगातार खांसी हो सकती है , यानी संक्रमित व्‍यक्ति को पन्द्रह मिनट या उससे अधिक वक्त तक लगातार खांसी आ सकती है और 24 घंटों के भीतर कम से कम तीन बार इस तरह की खांसी आ सकती हैं. यदि संक्रमित व्‍यक्ति को खांसी में बलग़म आता है तो ये चिंता की बात हो सकती है. इस वायरस के कारण शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति का शरीर गर्म हो सकता है और उसे ठंडी महसूस हो सकती है. व्यक्ति को शरीर में कंपकंपी भी महसूस हो सकती है. इसके कारण गले में खराश, सिरदर्द और डाएरिया भी हो सकता है।
माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के लक्षण दिखना शुरु होने में लगभग पांच दिन का वक्त लगता है किन्तु किसी संक्रि‍मित में ये वक्त कम भी हो सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय लग सकता है।

कोराना का प्रभाव- 

कोरोना वायरस के संक्रमण के आँकड़ों की तुलना में मरने वालों की संख्या को देखा जाए तो ये बेहद कम हैं. हालांकि इन आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन आंकड़ों की मानें तो संक्रमण होने पर मृत्यु की दर केवल दो या तीन फ़ीसदी हो सकती है. कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बूढ़ों और पहले से ही सांस की बीमारी (अस्थमा) से परेशान लोगों, मधुमेह और हृदय रोग जैसी परेशानियों का सामना करने वालों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका अधिक होती है. कोरोना वायरस का इलाज इस बात पर आधारित होता है कि मरीज़ के शरीर को सांस लेने में मदद की जाए और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि व्यक्ति का शरीर ख़ुद वायरस से लड़ने में सक्षम हो जाए।




कोराना से बचाव कैसे करें -

कोरोना वायरस यानी 'कोविड 19' से बचने के लिए आपकों नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं. अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं. इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं. संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते इंसान के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. अगर आप किसी ऐसी जगह को छूते हैं, जहां ये कण गिरे हैं और फिर उसके बाद उसी हाथ से अपनी आंख,  नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंचते हैं. ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें. इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं...
कोरोना वायरस 'COVID 19' हमारे देश भारत में भी आ  चुका है किन्तु इसके रोकना और इससे  बचाव भी हमारी सभ्यता में ही समाहित है, यह बात सुन कर कुछ बुद्धिजीवियों को हास्यास्पद जरुर लगेगा किन्तु यह एक तार्किक सत्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता, लेकिन जिस प्रकार कानून सबूत मांगता है वैसे ही लेख भी तर्क पर निर्भर करते है तो आपके समक्ष साक्ष्य तो प्रस्तुत करने ही होंगे कि किस प्रकार भारतीय संस्कृति ने कोरोना वायरस की जंग में अहम् भूमिका अदा की है. कोरोना वायरस के बचाव के लिए जो तथ्य बताए गए है वो चाहे हाथ धोना हो या घर पर साफ़ सफ़ाई रखने की बात उक्त सभी का उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथों में समाहित है, एक तथ्य तो विचारणीय है कि कोरोना वायरस के संकट में ही सही कोरोना वायरस ने पुन: भारतीय वासियों को भारतीय संस्कृति में जीवन-यापन करना तथा उसका महत्त्व सिखा दिया है...


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भारत सरकार ने भी जारी की एडवाइज़री


भारत सरकार ने भी कोरोना वायरस के लक्षण मिलने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर सूचना देने को कहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम तैयार किया गया है.

फोन नंबर 011-23978046 के माध्यम से कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा ncov2019@gmail.com पर मेल कर के भी कोरोना वायरस के लक्षणों या किसी भी तरह की आशंकाओं के बारे में जानकारी ली जा सकती है।


भारतीय सभ्‍यता में कोरोना

हमारे भारतीय सभ्यता के अनुसार गृह प्रवेश करने से पूर्व हाथ तथा पैर धोने का रिवाज आदि काल से रहा है साथ ही भोजन से पूर्व एवं उपरांत में भी हाथ को धोने का चलन है, घर के आँगन में गोबर से लेपन का महत्व इसलिए था जिससे घर के आंगन की साफ़-सफ़ाई की जा सके तथा दूषित हुए आँगन को स्वच्छ किया जा सके, घर के आँगन की चर्चा हो तो तुलसी के पौधे का जिक्र होना लाज़मी है जिसकी उपयोगिता से कोई भी भारतीय अंजान नहीं है और यदि अंजान होगा भी तो उसे कोरोना वायरस के दौर में तुलसी के पत्तो के सभी महत्वों का ज्ञान हो जायेगा, शुद्ध वातावरण के लिए घर की चार दीवारी के बाहर नीम के वृक्ष के रोपण की प्रथा वर्षों पुरानी है यदि यह बात आम-जन समय रहते समझ जाते तो कोरोना वायरस के संकट में घर की शुद्धी ना करनी होती. अब बात करें खान-पान की तो कोरोना वायरस से बचने के लिए टमाटर, आंवला, संतरा एवं हरी सब्जियों के सेवन, गिलोय एवं तुलसी का काड़ा तथा गर्म पानी पीने की बात कही गई है, जिनका उल्लेख स्वस्थ्य शरीर के लिए अथर्वेद एवं चरक संहिता में शताब्दियों पहले ही किया जा चुका है।

कारोना का जन्‍म

कोरोना वायरस की चर्चा हो तो चीन का उल्लेख होना भी आवश्यक है क्योंकि कोरोना वायरस का जन्‍म या संक्रमण चीन देश से ही प्रारंभ हुआ था, लेकिन अनेकों पहलुओं पर ध्यान देना भी आवश्यक है कि जिस देश में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला उस देश में कोरोना वायरस पर लगाम लगा दी गई तथा उक्त राष्ट्र की अर्थव्यवस्था और शेयर मार्किट में गिरावट आने के बजाय चाइना के व्यापार में सकारात्मक पहलु देखने को मिले, संक्रमित देशों की सूची पर ध्यान से नज़र डालने पर संदेह और भी पुख्ता हो जाता है क्योंकि अमेरिका ही विश्व व्यापारिक पटल पर चीन का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी है और संक्रमित इंसानों एवं मृतकों की सूची में भी अमेरिका प्रथम स्थान पर है. एक तथ्य और भी विचारणीय है कि चीन देश के संघाई क्षेत्र अब भी कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षित है, किसने सोचा होगा कि टच स्क्रीन मोबाईल, कैमरा, टी.वी. घड़ी देने वाला देश टच वाली बीमारी की ईजात करेगा।

भारत देश के उपाय

मोदी जी ने अपने संबोधन में सभी देशवासियों को घरों में रहने की बात कही थी इस कथन का समर्थन सभी धर्मों ने किया, मंदिरों में जहाँ नवरात्री, रामनवमी एवं हनुमान जयंती के अवसर पर भी ताले लगे होने के दृश्य देखने को मिले वहीँ घरों में रह कर नमाज़ पढ़ने की बात भी सामने आई, किन्तु गुरुद्वारों ने तो एक कदम आगे आकर इस संकट की घड़ी में भी लंगर की प्रथा को जारी रखा. भारतीय सभ्यता की बात हो और नरेन्द्र मोदी जी का उल्लेख ना हो ऐसा तो संभव नहीं है, देश में जब कोरोना वायरस का संकट हुआ तो मोदी जी ने 22 मार्च के दिन जनता कर्फ्यू की घोषणा कि तथा कोरोना वारियर्स अर्थात चिकित्सक, पुलिस, सफ़ाई कर्मचारियों एवं मीडिया के सम्मान में और समूचे देशवासियों से शाम 5 बजे 5 मिनट के लिए ताली, थाली, घंटी या शंख बजाने की मांग की जिसका पालन देशवासियों ने किया भी, मोदी जी ने देश को पुन: संबोधित करते हुए 5 अप्रैल के दिन रात्रि 9 बजे 9 मिनट के लिए दीपक, मोमबत्ती, टॉर्च, मोबाइल की फ़्लैश लाइट जलाने का आग्रह किया और इस अवसर को देशवासियों ने दीपोत्सव के समान मनाया, जिसके पीछे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने एवं उत्साह का संचार करने का प्रयास छिपा हुआ था, यदि उक्त संबोधनों के सकारात्मक पक्ष पर नज़र डाले तो पाएंगे कि भारतीय सभ्यता में बताया गया है कि शंख की ध्वनि से अनेकों कीटाणुओं एवं विषाणुओं का अंत होता है तथा दीपक के आलौकिक प्रकाश से तेज प्राप्त होता है, किन्तु अध्यात्म की ओर ध्यान दें तो पाएंगे कि किसी भी युद्ध से पूर्व शंख बजाने की प्रथा महाभारत काल से ही है अर्थात भारत वर्ष में कोरोना वायरस के युद्ध के पूर्व शंखनाद करना सटीक ही प्रतीत होता है, अब बात करें दीपोत्सव की तो रामायण काल में भगवान् श्री राम के अयोद्ध्या आने पर तो घी के दीपक जलाए गए थे किन्तु इल्म हो कि लक्ष्मण जी के मूर्छित होने के पश्चात् भी उर्मिला द्वारा आशा रुपी दीपक जलाए गए थे, तो कहा जा सकता है कि दीपोत्सव को कोरोना वायरस से संक्रमित एवं कोरोना वायरस की जंग से लड़ रहे योद्धाओं हेतु आशा रुपी दीपक जलाया गया था।


संचार की भूमिका

अप्रत्यक्ष रूप में ही सही किन्तु देश की कोरोना वायरस की जंग में अहम् भूमिका दूरदर्शन की रही, जिसके माध्यम से दूरदर्शन पर वर्षों पहले प्रसारित किए गए कार्यक्रमों को पुन: नव पीढ़ी के समक्ष परोसा गया, जिसमें सबसे अधिक चर्चित कार्यक्रम रहा रामायण जिसे देखने और सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने पर नज़र डाले तो पाएंगे कि TRP के मामले में रामायण केवल 5 दिवस के अन्दर ही सभी कार्यक्रमों से आगे निकल गया तथा ट्रेंडिंग में 7 दिवस के अन्दर ही सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस की जगह रामायण ट्रेंड करने लगा, तो आप स्वयं विचार कर सकते है कि भारतीय दर्शकों पर रामायण का क्या प्रभाव रहा, लॉक डाउन के समय रामायण के साथ-साथ राष्ट्रीय चैनल पर महाभारत, शक्तिमान, मोगली, चाणक्य, देख भाई देख, बुनियाद, श्रीमान जी श्रीमति जी जैसे कार्यक्रमों का प्रसारण पुन: प्रारंभ किया गया है और कहा जा सकता है कि बिग बॉस और रोड़ीस जैसे कार्यक्रमों से आज के युवाओं के विचारों पर जो धूल पड़ गई थी उसे रामायण और महाभारत जैसे कार्यक्रमों ने सेनेटाईज़ किया है ।

 
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